दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (The Association of Southeast Asian Nations - ASEAN)
परिचय: आसियान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों द्वारा गठित एक क्षेत्रीय अन्तरसरकारी संगठन है, जिसका गठन दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक विकास तेज करने, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास सुनिश्चित करने तथा शांति और सुरक्षा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से किया गया है।
स्थापना: 1967
मुख्यालय: जकार्ता (इण्डोनेशिया)
सदस्यता: ब्रूनेई, कम्बोडिया, इण्डोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपीन्स, सिंगापुर, थाईलैण्ड और वियतनाम।
संवाद सहयोगी: आस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, कोरिया गणतंत्र, न्यूजीलैंड, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका।
आधिकारिक भाषा: अंग्रेजी
उद्देश्य
आसियान के लक्ष्य हैं-
1. आसियान क्षेत्र में आर्थिक वृद्धि, सामाजिक उन्नति और सांस्कृतिक विकास की गति को त्वरित करना;
2. आर्थिक, सामाजिर्क, सांस्कृतिक, तकनीकी, वैज्ञानिक और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े सामूहिक हित के विषयों में सक्रिय सहयोग और पारस्परिक सहायता को प्रोत्साहन देना, तथा;
3. सदस्य देशों द्वारा कृषि और उद्योग के अधिक उपयोग, व्यापार में विस्तार (अंतरराष्ट्रीय वस्तु व्यापार की समस्याओं के अध्ययन सहित), परिवहन और संचार सुविधाओं में सुधार तथा लोगों के जीवन स्तर में वृद्धि लाने के लिये अधिक प्रभावशाली सहयोग प्रदान करना।
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन ( South Asian Association for Regional Cooperation - SAARC)
परिचय: 'दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन' दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। संगठन के सदस्य देशों की जनसंख्या (लगभग 1.7 अरब) को देखा जाए तो यह किसी भी क्षेत्रीय संगठन की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली है।
स्थापना : 8 दिसम्बर 1985
मुख्यालय: काठमांडू (नेपाल)।
सदस्यता: बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान।
पर्यवेक्षक राष्ट्र: ऑस्ट्रेलिया, चीन, यूरोपीय संघ, ईरान, जापान, मॉरीशस, म्यांमार, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका।
उद्देश्य: आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास जैसे क्षेत्र में तेजी लाना और सभी व्यक्तियों को आत्म सम्मान के साथ उन्हें रहने और उन्हें अपनी क्षमता का अहसास दिलाकर उन्हें अवसर प्रदान करना है।
मेकाग-गंगा सहयोग ( Mekong–Ganga Cooperation - MGC)
परिचय: यह संगठन गंगा और मेकांग नदी क्षेत्रों के छह देशों की आर्थिक सहयोग के उद्देश्य से एक मंच पर लाता है।
सदस्यता: कबोडिया, भारत, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम।
उत्पति एवं विकास: जुलाई 2000 में बैंकॉक (थाईलैंड) में चल रही आसियान मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान 6 देशों के विदेश मंत्रियों की अलग से बैठक हुई। इसी बैठक में मेकांग-गंगा सहयोग संगठन को गठित करने का निर्णय लिया गया। इस संगठन का विधिवत् उद्घाटन 10 नवंबर, 2000 को विनतियेन (लाओस) में हुआ। इससे पूर्व हुई वियेनतियेन उद्घोषणा में इस संगठन के मौलिक उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी। छह सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे मंत्रियों ने इस घोषणा पर हस्ताक्षर किये।
उद्देश्य: एमजीसी के उद्देश्य हैं- मैत्री, एकजुटता और सहयोग बढ़ाने के लिये सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल और घनिष्ठ संबंध विकसित करना; क्षेत्र के लोगों और वस्तुओं के अंतर्देशीय आवागमन और पारगमन को सरल बनाना; गंगा-मेकांग नदी घाटी क्षेत्रों में आवश्यक मौलिक सुविधाओं का सृजन करना, और; गरीबी-उन्मूलन में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहन देना।

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