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Saturday, 28 October 2017

अन्तराष्ट्रिय संगठन भाग - 2


अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ( International Labour Organisation - ILO)


परिचय: आईएलओ एक ऐसा अंतराष्‍ट्रीय संगठन है जो अंतराष्‍ट्रीय श्रमिक मानक तैयार करने और सिहांवलोकन के लिए उत्‍तरदायी है। यह एकमात्र ऐसी ‘त्रिपक्षीय’ संयुक्‍त राष्‍ट्र संस्था है जो सभी के उपयुक्‍त कार्य को बढ़ावा देकर एक साथ मिलकर नीतियों और कार्यक्रमों को मूर्त रूप देने हेतु सरकारों के प्रतिनिधियों, कर्मचारियों और कामगारों को एक साथ मिलाती है। यह विलक्षण व्‍यवस्‍था आईएलओ को रोजगार और कार्य के बारे में ‘वास्‍तविक जगत’ संबंधी जानकारी शामिल करने के लिए प्रोत्‍साहित करती है।



स्थापना : 11 अप्रेल 1919 में


मुख्यालय:  जेनेवा ( स्विट्जरलैंड )



उद्देश्य: आईएलओ का मूल उद्देश्य रहन-सहन के स्तर एवं श्रम की अन्य दशाओं को सुधारने तथा पूर्ण रोजगार का लक्ष्य प्राप्त करने पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय क्रिया-कलापों को प्रोत्साहित करना है। यह अंतरराष्ट्रीय श्रम संधियों एवं सिफारिशों के आधार पर श्रम मानदंडों की रचना करता है तथा रोजगार संवर्धन, मानव संसाधन विकास, सामाजिक संस्थाओं के विकास, ग्रामीण विकास, लघु उद्योग, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग का विस्तार करता है। संगठन द्वारा विशेषज्ञ अभियानों एवं फैलोशिप कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न देशों की सरकारों की प्रेरक सहायता उपलब्ध करायी जाती है।
 अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के सदस्यों की संख्या 1999 में 174 थी। इसे 1969 में शांति का नोबेल पुरस्कार भी दिया जा चुका है।




अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ( International Court of Justice - ICJ)


परिचय: अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायाधीश होते हैं, जिनका चुनाव 9 वर्षीय कार्यकाल के लिए महासभा एवं सुरक्षा परिषद द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाता है। एक-तिहाई स्थानों के लिए प्रति तीन वर्षों के बाद चुनाव होते हैं। न्यायाधीश विभिन्न राष्ट्रीयताओं से संबद्ध होते हैं तथा स्थायी विवाचन न्यायालय (1899 व 1907 के हेग सम्मेलनों द्वारा स्थापित) में मौजूद राष्ट्रीय समूहों द्वारा नामांकित किये जाते हैं। अंर्तराष्ट्रीय न्यायालय में विश्व की प्रमुख वैधानिक व्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व होता है तथा किसी भी राष्ट्र के दो न्यायाधीशों को नहीं चुना जाता है। किसी भी न्यायाधीश को राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधियों में भाग लेने की स्वीकृति नहीं दी जाती। न्यायाधीशों को अपेक्षित सेवा शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में ही पदच्युत किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तीन वर्षीय कार्यकाल हेतु अपने अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव करता है।


स्थापना : 26 जून 1945 में

मुख्यालय : दि हेग (नीदरलैंड)


न्यायालय का अधिकार क्षेत्र : न्यायालय का अधिकार क्षेत्र निम्नलिखित चार पद्धतियों द्वारा सुनिश्चित होता है-

1. दो या अधिक राज्य विशेष समझौतों के माध्यम से अपने पारस्परिक विवादों को न्यायालय के सामने ला सकते हैं।
2. किसी बहुपक्षीय संधि में यह प्रावधान किया जा सकता है कि संधि की व्याख्या से जुड़े मामालों पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ही विचार-विमर्श किया जा सकेगा।
3. किसी द्वि-पक्षीय संधि द्वारा किसी विशिष्ट मामले की सुनवाई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कराये जाने की व्यवस्था की जा सकती है।
4. न्यायालय में प्रक्रिया शुरू होने के बाद अनौपचारिक रूप से किसी मामले में न्यायालय का अधिकार क्षेत्र विस्तृत हो सकता है।





विश्व व्यापार संगठन ( World Trade Organisation – WTO)


परिचय : 'विश्व व्यापार संगठन' विश्व की सबसे प्रमुख मौद्रिक संस्था है, जो विश्व व्यापार के लिये दिशा निर्देशों को जारी करती है।


स्थापना : 1 जनवरी, 1995 में


मुख्यालय :  जेनेवा, स्विट्जरलैंड में


विश्व व्यापार संगठन के कार्य:

1. इस संस्था का मूल उद्देश्य व्यवसायिक गतिविधियों को अंजाम देने,माल और सेवाओं के आयात करने, आयातकों और निर्यातकों को अनेक सुविधाएं देने आदि के सन्दर्भ में अनेक सुविधायें उपलब्ध कराना है।
2. व्यापार और प्रशुल्क से सम्बंधित किसी भी भावी मसाले पर सदस्यों के बीच विचार-विमर्श हेतु एक मंच के रूप में कार्य करता हैं।
3. सदस्य देशों की व्यापारिक नीतियों को तकनीकी एवं ट्रेनिंग कार्यक्रमों की सहायता से सुचारू बनाना।
4. विकासशील देशों को तकनीकी एवं कुशल सहायता मुहैया कराना।
5. वैश्विक आर्थिक निति निर्माण में अधिक सामंजस्य भाव लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व बैंक से सहयोग करता है।





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